Thursday, 3 April 2025

Raag aur thaat me antar

 थाट और राग में अंतर

प्र. राग और थाट की परिभाषा देते हुए अंतर स्पष्ट करें।

थाट: संगीत में नाद से श्रुति, श्रुति से स्वर तथा स्वर से सप्तक की उत्पत्ति मानी गई है। सप्तक के स्वरो मै शुद्ध और विकृत रूपों सहित और जिसमें राग उत्पन्न करने की क्षमता हो उसको थाट कहते है। थाट को मेल भी कहा जाता है।

राग: राग शब्द का अर्थ है आनंद देना। कम से कम पाँच और अधिक से अधिक सात विशिष्ट स्वरो तथा वर्णों की सुंदर ताल बद्ध रचना राग कहलाती है।

थाट और राग में अंतर


थाट राग
(i)

(ii)

(iii)

(iv)

(v)

(vi)

(vii)


(viii)

थाट की उत्पत्ति सप्तक के शुद्ध अथवा विकृत 12 स्वरो से होती है।

थाट में सात स्वर अनिवार्य है।

थाट में स्वरो का क्रमानुसार होना आवश्यक है।

थाट में केवल आरोह की आवश्यकता होती है।

थाट गाया-बजाया नहीं जाता।

थाट में रंजकता की आवश्यकता नहीं होती है।

थाट में सोंदर्य का होना आवश्यक नहीं क्योंकि ये स्थिर स्वर समूह है।

थाट मे उसके अंतर्गत आने वाले किसी प्रसिद्ध को आश्रय राग कहा जाता है।
राग की उत्पत्ति थाट से होती है।

राग में कम से कम पाँच और अधिक से अधिक सात स्वर अनिवार्य है।

राग में स्वरो का क्रमानुसार होना आवश्यक नहीं है।

राग में आरोह-अवरोह दोनो का होना आवश्यक है।

राग गाया बजाया जाता है।

राग में रंजकता की आवश्यकता होती है।

राग मे सौंदर्य का होना आवश्यक है।

राग का नाम थाट से लिया गया है।

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