Sunday, April 20, 2025

Murchhana मूर्च्छना definition in music

मूर्च्छना

मूर्च्छना शब्द मूर्च्छ धातु से बना है जिसका अर्थ है ‘चमकना’ । 

परिभाषा: भरतमुनि और पं. शारंगदेव के अनुसार सात स्वरों के क्रमानुसार आरोह-अवरोह करने को मूर्च्छना कहते है।

मूर्च्छना के प्रकार: ग्राम तीन प्रकार के हैं तथा प्रत्येक ग्राम में सात स्वर होते हैं। अतः 7×3=21 मूर्च्छनाएँ प्राप्त होती है।

1. षडज ग्रामिक मूर्च्छना: यह मूर्च्छना षडज ग्राम के ‘स’ स्वर से आरंभ होती है। बाकी की छह (6) मूर्च्छनाएँ एक-एक स्वर नीचे उतर कर, उसी स्वर को आधार मानकर सात स्वरो का आरोह तथा अवरोह करने से प्राप्त होती है। अतः यह मूर्च्छनाएँ क्रमशः स, रे, ग, म, प, ध, नि स्वरों से आरंभ होती हे।

2. मध्यम ग्राम मूर्च्छना: यह मूर्च्छना मध्यम स्वर से आरंभ की जाती है क्योंकि मध्यम ग्राम में ‘म’ को ‘स’ मानकर गाया जाता है। इस ग्राम की अन्य मूर्च्छनाएँ एक-एक स्वर नीचे उतर कर सात स्वरो का क्रमानुसार आरोह-अवरोह कर के पाई जाती है। मध्यम ग्राम की सात मूर्च्छनाएँ क्रमशः म, ग, रे, स, नि, ध, प स्वर से शुरू की जाती है।

3. गंधार ग्राम की मूर्च्छना: इस ग्राम को स्वर्ग स्थित मानकर किसी भी ग्रंथकार ने वर्णन नहीं किया है। तथापि नाम अवश्य दिए हैं। इस ग्राम की पहली मूर्च्छना ‘नि’ स्वर से आरंभ की जाती है। इसके बाद एक-एक स्वर नीचे उतरते है। 

सारांश: प्राचीन काल में राग गायन की जगह जाति गायन किया जाता था तब ग्राम मूर्च्छना का बड़ा महत्व था। आधुनिक युग में मूर्च्छना का प्रचार बिल्कुल बंद है क्योंकि ‘स’ को ही राग का आधार स्वर माना जाता है लेकिन दक्षिण भारतीय संगीत में आज भी मूर्च्छना प्रयोग होता है। 

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