Saturday, 8 March 2025

स्वर Swar definition in music

 स्वर 

सप्तक की बाइस (22) श्रुतियों में से चुनी गई सात (7) श्रुतियाँ जो सुनने में मधुर है, जो एक-दूसरे से काफी अंतर पर रखी गई है और किसी राग विशेष में प्रयोग होती है, स्वर कहलाती है। स्वर और श्रुति में इतना ही अंतर है, जितना साँप और उसकी कुण्डली मे।

पं. अहोबल के अनुसार वह आवाज जो अपने-आप ही सुनने वाले के चित्त (मन) को आकर्षित करती है, वे स्वर कहलाती है। 

पं. शारंगदेव के ग्रंथ ‘संगीत रत्नाकर’ में स्वर का भावार्थ यह है कि श्रुति के पश्चात तुरंत उत्पन्न होने नाद (आवाज़) जो सुनने वाले के चित्त को रंजन कर सकता है। वह स्वर कहलाता है। 

स्वर संख्या: हमारे संगीतकारों ने 22 श्रुतियों में से 12 स्वर चुन कर अपना गायन शुरू किया। इन्हीं 12 स्वरो में से सात 7 शुद्ध और पाँच 5 विकृत स्वर माने गये है। 

स्वरों के रूप:
1. शुद्ध स्वर- जब स्वर नियमित स्थान पर स्थित होते है, उनको शुद्ध स्वर कहते है। जैसे: स, रे, ग, म, प, ध, नि। इन सात स्वरों मे से  स, प अचल स्वर है क्योंकि यह अपने स्थान से कभी भी नही हटते। इनके दो रूप नहीं होते। 

2. विकृत स्वर- रे, ग, म, ध, नि ये विकृत स्वर है। ये अपने नियत स्थान से ऊँचे या नीचे किए जा सकते है। 

3. कोमल स्वर- रे, न, ध, नि इन स्वरो के नीचे एक रेका (खींच दी जाती है।) खींची जाती है। ये स्वर अपने नियमित स्थान (से नीचे किए जाते है।) पर प्रयोग किए जाते है।

4. तीव्र स्वर- जब शुद्ध मध्यम स्वर को उसके नियत स्थान से ऊँचा किया जाता है तो तीव्र माध्यम बजता है। इसको पहचानने के लिए म के ऊपर खड़ी रेखा लगा देते है। इस प्रकार सप्तक के कुल 12 स्वर भारतीय संगीत का आधार है।

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