Sunday, 23 February 2025

Essay On Swadesh Prem in Hindi

 स्वदेश प्रेम || Essay On Swadesh
Prem in Hindi

स्वदेश प्रेम का अर्थ है अपने देश से प्यार अथवा अपने देश के प्रति: श्रद्धा । जो मनुष्य जिस देश मैं पैदा होता है, उसका अन्न-जल खा पी कर बड़ा होता है, वही पढ़ लिख कर विद्ववान बनता है, वही उसकी जन्मभूमि है । प्रत्येक मनुष्य अपने देश से प्यार करता है । वह कही भी चला जाए, संसार भर की खुशियाँ तथा महलो के बीच मे क्यों न विचरण कर रहा हो, उसे अपना देश की प्रिय लगता है। देशभक्त सदा अपने देश की उन्नति के बारे मे सोचता है। हमारा इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब-जब देश पर विपत्ति के बादल मंडराए, जब-जब  हमारी आजादी को खतरा रहा, तब-तब हमारे देश भक्तो ने अपनी भक्ति भावना दिखाई।  सच्चे देश भक्त अपने सिर पर लाठियाँ खाते है, जेलो मे भी जाते है और हंसते-हंसते फांसी के फंदे चूम उठते है।

महात्मा गाँधी, जवाहर लाल, सुभाष चंद्र, भगत सिंह, लाला लाजपत राय, चन्द्रशेखर आदि देश भक्तो ने आजादी प्राप्त करने के लिए सच्चा देश भक्त दिखलाया । वे देश के लिए मर मिटे पर शत्रु के आगे झुके नही । उन्होने यह निश्चय किया था कि
                सर कटा देंगे मगर सर झुकाएंगे नहीं।
जो कुछ हमने प्राप्त किया है तथा जो कुछ हम बन पाए है, इन्ही के परिणाम स्वरूप हम स्वतंत्रता मे सांस ले रहे है। इसलिए इन वीरों से प्रेरणा ले कर हम भी निस्वार्थ भाव से अपने देश की सेवा करने का प्रण करना चाहिए तथा अपने देश की रक्षा करनी चाहिए।

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