Tuesday, 22 April 2025

मींड Meend Definition in hindi in Music

 मींड 

किन्ही दो स्वरों का इस प्रकार गाने अथवा बजाने को मींड कहते है, जिससे  रिक्त-स्थान ना रहे। दूसरे स्वर में एक स्वर से दूसरे स्वर तक जाने को मींड कहते है। मींड लिखते समय बीच के स्वरो का स्पर्श इस प्रकार होता है कि वे अलग-अलग दिखाई नहीं पड़ते। उदाहरण स से म तक मींड लेते समय बीच के स्वरो का स्पर्श आवश्य होता है। किंतु वे अलग-अलग सुनाई नहीं देते। मींड लिखने के लिए स्वरो के ऊपर उल्टा अर्ध चंद्रकार बनाते है जैसे 

। मींड भारतीय संगीत की विशेषता है। इससे गाने में लोचा और रंजकता आती है। 

Monday, 21 April 2025

Gram ग्राम definition in music

 ग्राम 

ग्राम संस्कृत भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है गाँव। स्वर व श्रुतियाँ के रहने की जगह को ग्राम कहते है। 

संगीत रत्नाकर में पं. शारंगदेव जी लिखते है- ऐसा स्वर समूह जो मूर्च्छनाओं का आधार हो ग्राम कहलाता है।

1. षडज ग्राम: 

इसे षडज ग्राम इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह षडज (स) स्वर से आरंभ होता है। इस ग्राम में स-प, रे-ध, ग-नि, म-स में परस्पर संवाद है। 

2. मध्यम ग्राम: जब न शुद्ध स्वरो को 22 श्रुतियों पर 4-3-2-4-3-4-2 के क्रम से स्थापित किया जाता है तो मध्यम ग्राम की प्राप्ति होती है। मध्यम ग्राम में पंचम की एक श्रुति कम होकर धैवत को मिल जाती है। अतः मध्यम ग्राम में पंचम 3 श्रुतियों का रह जाता है। मध्यम ग्राम की श्रुति स्वर स्थापना —


3. गंधार ग्राम: इसका प्रयोग गंधर्व लोक में किया जाता है। भरतमुनि ने अपने नाट्यशास्त्र (उनकी पुस्तक) में इसके बारे में कुछ नहीं लिखा। यह ग्राम प्राचीनकाल में ही खत्म होने लगा था।

सारांश: आधुनिक 12 स्वरों की प्रणाली में यह व्यवस्था मेल नहीं खाती। अतः आज ग्राम की उपयोगीता खत्म हो गई है।

Sunday, 20 April 2025

Murchhana मूर्च्छना definition in music

मूर्च्छना

मूर्च्छना शब्द मूर्च्छ धातु से बना है जिसका अर्थ है ‘चमकना’ । 

परिभाषा: भरतमुनि और पं. शारंगदेव के अनुसार सात स्वरों के क्रमानुसार आरोह-अवरोह करने को मूर्च्छना कहते है।

मूर्च्छना के प्रकार: ग्राम तीन प्रकार के हैं तथा प्रत्येक ग्राम में सात स्वर होते हैं। अतः 7×3=21 मूर्च्छनाएँ प्राप्त होती है।

1. षडज ग्रामिक मूर्च्छना: यह मूर्च्छना षडज ग्राम के ‘स’ स्वर से आरंभ होती है। बाकी की छह (6) मूर्च्छनाएँ एक-एक स्वर नीचे उतर कर, उसी स्वर को आधार मानकर सात स्वरो का आरोह तथा अवरोह करने से प्राप्त होती है। अतः यह मूर्च्छनाएँ क्रमशः स, रे, ग, म, प, ध, नि स्वरों से आरंभ होती हे।

2. मध्यम ग्राम मूर्च्छना: यह मूर्च्छना मध्यम स्वर से आरंभ की जाती है क्योंकि मध्यम ग्राम में ‘म’ को ‘स’ मानकर गाया जाता है। इस ग्राम की अन्य मूर्च्छनाएँ एक-एक स्वर नीचे उतर कर सात स्वरो का क्रमानुसार आरोह-अवरोह कर के पाई जाती है। मध्यम ग्राम की सात मूर्च्छनाएँ क्रमशः म, ग, रे, स, नि, ध, प स्वर से शुरू की जाती है।

3. गंधार ग्राम की मूर्च्छना: इस ग्राम को स्वर्ग स्थित मानकर किसी भी ग्रंथकार ने वर्णन नहीं किया है। तथापि नाम अवश्य दिए हैं। इस ग्राम की पहली मूर्च्छना ‘नि’ स्वर से आरंभ की जाती है। इसके बाद एक-एक स्वर नीचे उतरते है। 

सारांश: प्राचीन काल में राग गायन की जगह जाति गायन किया जाता था तब ग्राम मूर्च्छना का बड़ा महत्व था। आधुनिक युग में मूर्च्छना का प्रचार बिल्कुल बंद है क्योंकि ‘स’ को ही राग का आधार स्वर माना जाता है लेकिन दक्षिण भारतीय संगीत में आज भी मूर्च्छना प्रयोग होता है। 

Saturday, 19 April 2025

गमक gamak definition in music in hindi

गमक

गाने और बजाने की विशेष क्रिया को गमक कहते है। स्वरो को जब विशेष ढंग से हिलाकर उनमें कंपन पैदा करके गाया जाता है तो उसे गमक कहते है।

गमक द्वारा स्वरो की क्रिया कई प्रकार से की जाती है।
1. किसी एक स्वर का जल्दी-2 कंपन करना। 
2. एक स्वर से दूसरे स्वर पर जाते समय उसके ऊपर तथा नीचे के स्वर को खींचते हुए जाना। 
3. एक स्वर से दूसरे स्वर पर एक ही बार जाना। 
4. एक स्वर से दूसरे स्वर पर ध्वनि को बिना तोड़े जाना।

कुछ विद्वान गमक के 19 प्रकार मानते है परन्तु प्राचीन ग्रंथों में गमक के 15 प्रकार ही प्राप्त होते हैं। जैसे:-
1. अंदोलित: जब किसी स्वर का कम्पन एक मात्रा काल मे किया जाता है तो उसे अंदोलित कहते है।

2. लीन: जब किसी स्वर का कम्पन मात्रा के 1/2 काल में किया जाता है तो उसे लीन कहते है।

3. प्लावित: जब किसी स्वर का कम्पन मात्रा के 3/4 काल में किया जाता है तो उसे प्लावित कहते है।

4. कंपित: जब किसी स्वर का कम्पन मात्रा के 1/4 काल में किया जाता है तो उसे कंपित कहते है।

5. स्फुरित: जब किसी स्वर का कम्पन मात्रा के 1/6 काल में किया जाता है तो उसे स्फुरित कहते है।

6. आहत: जब मूल स्वर के साथ दूसरे स्वर का हल्का सा स्पर्श किया जाए तो उसे आहत कहते है।

7. उल्लासित: जब स्वरो को ऊपर से नीचे या नीचे से ऊपर क्रमबद्ध रूप से हिलाया जाए तो उसे उल्लासित कहते है।

8. नामित: जब स्वरो का कंपन नम्रता से किया जाए तो उसे नामित कहते है।

9. मिश्रित: जब दो से ज्यादा प्रकारो को मिलाकर गाया बजाया जाए तो उसे मिश्रित कहते है।

आधुनिक अर्थ: आधुनिक हिंदुस्तानी संगीत पद्धति में गमक का अर्थ भी बदल चुका है। गमक के प्रयोग मे सावधानी, सूझ-बूझ और अभ्यास की आवश्यकता है। उसका अधिक प्रयोग रस पैदा कर सकता है। गमक हिंदुस्तानी संगीत को पाश्चात्या संगीत से अलग करने वाली रेखा है।

Marketing Research Process Procedure

 Q. Explain the procedure of conducting marketing research .  Ans. Marketing research process consists a sequence of several steps, these st...