Sunday, 2 March 2025

romanchak yatra Essay in Hindi

 रोमांचक यात्रा 

यात्रा हमारे मनोरंजन का महत्वपूर्ण साधन है। अपने प्रतिदिन के कार्यों से उबकर हमारी इच्छा किसी स्थान की यात्रा करने की होती है। जिस यात्रा से हमारे अंदर/अन्दर रोमांच पैदा होता है, वह रोमांचक यात्रा बन जाती है। यदि वह यात्रा पर्वतीय स्थान की हो, तो कहना ही क्या। पर्वतीय स्थान की यात्रा बहुत रोमांचक होती है। अम्बाला से वैष्णो देवी की यात्रा पर जाने के लिए रेल द्वारा जम्मू तक पहुँचा जा सकता है। मेरे पिता जी ने जम्मूतवी एक्सप्रेस के वातानुकूलित कक्ष मे चार टिकट पहले से आरक्षित करवा लिए थे। मेरे माता-पिता, मै, और मेरा भाई रेलवे-स्टेशन पर गए। वहाँ बहुत भीड़ थी। यात्रा के दौरान हमने देखा कि हमारे डिब्बे मे अनेक यात्री वैष्णो देवी की पवित्र एवं धार्मिक यात्रा पर जा रहे थे। हम गाड़ी के डिब्बे मे से प्राकृतिक दृश्यो का आनन्द ले रहे थे। फिर हम सबने खाना खाया। फिर अपनी सीटो पर सौ गए। सुबह होने पर खिङकी से झाँक कर देखा तो चारों ओर सुषमा खिली हुई थी। यह दृश्य देख हम सबका मन रोमांचक से भर गया। जम्मू पहुंच कर हम सबने विश्राम किया।

Thursday, 27 February 2025

Mere Jeevan Ka Lakshya Essay in Hindi: ‘मेरे जीवन का लक्ष्य’ पर निबंध

 मेरे जीवन का लक्ष्य ।। Essay on Mere Jeevan Ka Lakshya Essay in Hindi: ‘मेरे जीवन का लक्ष्य’ पर निबंध

मेरे जीवन का लक्ष्य 
पूर्व चलने की बटोही,
बाट की पहचान कर लो
जीवन एक यात्रा  है। इस यात्रा मे हर यात्री मार्ग निश्चित कर के अपने-अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ता है। किसी का लक्ष्य है इंजीनियर बनना, किसी का डॉक्टर, किसी का अध्यापक, किसी का नेता और किसी का अभिनेता। मै भी चाहता हूँ की मैं अभी से अपना लक्ष्य निर्धारित कर लूँ और उसी लक्ष्य को पाने के लिए निरंतर संघर्ष करूँ। मै जानता हूँ कि लक्ष्यहीन जीवन उस नाव की तरह है, जो समुद्र के थपेङो से टकरा कर भँवर मे डूब जाती है। अतः मैने तो अभी से ही अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर लिया है। मै चाहता हूँ कि मै एक चिकित्सक बनूँ। देश तथा समाज की सेवा करूँ। कोई चिकित्सक जब गरीब को सांत्वना दे कर उचित परामर्श (सलाह) दे कर उसे नवजीवन प्रदान करता है, तो मेरी भी इच्छा होती है - कारा मैं भी चिकित्सक होता और देश के दरिद्र नारायण की सेवा कर सकता। अभी तो मैं अपने लक्ष्य की निचली सीढ़ी पर हूँ। परन्तु मै निरंतर प्रयत्नशील हूँ कि मै अपने लक्ष्य को प्राप्त करने मे सफल हो सकूँ। इसके लिए मुझे जी तोड़ परिश्रम करके अच्छे अंक प्राप्त करने होंगे। तभी मेरी साधना पूरी होगी। मै केवल जनता की चिकित्सा ही नही करूंगा वरण उनके पोषण तथा परिवार कल्याण के विषय मे भी उन्हे जागृत करूंगा। मै अपने आचरण मे गुणो का विकास करूँगा, जो एक सफल चिकित्सक मे होने चाहिए। मै सहानुभूति, सहनशीलता, विनम्रता, परोपकार आदि गुणो को अभी से अपनाने का प्रयास करूँगा। मुझे विश्‍वास है कि मैं अपने लक्ष्य को प्राप्त करने मे अवश्य सफल हो जाऊँगा। मानवता की सेवा करना ही मेरा परम कर्तव्य होगा। तभी मेरा जीवन का लक्ष्य सार्थक होगा।

Monday, 24 February 2025

Essay on Vyayam ke labh in Hindi

 व्यायाम के लाभ||Essay on Vyayam ke labh in Hindi

कहा जाता है कि इसमें ‘स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है।’ सत्य ही है यदि शरीर स्वस्थ है तो मन भी प्रसन्न रहता है। हर कार्य स्फूर्ति और लगन से करने के लिए हम। तत्पर रहते हैं। बीमार व्यक्ति सदा तक तक सा रहता है। और वह जीवन के आनन्द से वंचित रह जाता है। अतः ठीक ही कहते है कि जान है तो जहान है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नित्य व्यायाम करना बहुत आवश्यक है। व्यक्ति चाहे कितना भी पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन क्यों न खाए जब तक वह खेले कूदे नही या व्यायाम न करे, तब तक शक्ति संवर्धन नही कर सकता । व्यायाम से मांसपेशियाँ मजबूत होती है। रक्त का प्रवाह तेज होता है, पाचन शक्ति ठीक रहती है, अस्थियां मजबूत होती है। पसीना आने से अन्नावश्यक पदार्थ शरीर से बाहर आते है, त्वचा स्वस्थ बनती है, भूख बढ़ती है तथा शरीर मे स्फूर्ति बनी रहती है। व्यायाम से शरीर ही नही मन भी पवित्र और शुद्ध बनता है। महात्मा गांधी नियमित व्यायाम पर बल देते थे। व्यायाम करने से मनुष्य दीर्घायु होता है। अतः प्रत्येक व्यक्ति को नियमित व्यायाम करना चाहिए। व्यायाम करने वाले व्यक्ति को किसी भी बीमारी का शिकार नहीं बनना पड़ता। व्यायाम के अनेक लोगों को देखकर कहा गया है –
                                            नेम से व्यायाम नित कीजिए 
                                            जीवन का सुधा रस पीजिए 

Sunday, 23 February 2025

Essay On Swadesh Prem in Hindi

 स्वदेश प्रेम || Essay On Swadesh
Prem in Hindi

स्वदेश प्रेम का अर्थ है अपने देश से प्यार अथवा अपने देश के प्रति: श्रद्धा । जो मनुष्य जिस देश मैं पैदा होता है, उसका अन्न-जल खा पी कर बड़ा होता है, वही पढ़ लिख कर विद्ववान बनता है, वही उसकी जन्मभूमि है । प्रत्येक मनुष्य अपने देश से प्यार करता है । वह कही भी चला जाए, संसार भर की खुशियाँ तथा महलो के बीच मे क्यों न विचरण कर रहा हो, उसे अपना देश की प्रिय लगता है। देशभक्त सदा अपने देश की उन्नति के बारे मे सोचता है। हमारा इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब-जब देश पर विपत्ति के बादल मंडराए, जब-जब  हमारी आजादी को खतरा रहा, तब-तब हमारे देश भक्तो ने अपनी भक्ति भावना दिखाई।  सच्चे देश भक्त अपने सिर पर लाठियाँ खाते है, जेलो मे भी जाते है और हंसते-हंसते फांसी के फंदे चूम उठते है।

महात्मा गाँधी, जवाहर लाल, सुभाष चंद्र, भगत सिंह, लाला लाजपत राय, चन्द्रशेखर आदि देश भक्तो ने आजादी प्राप्त करने के लिए सच्चा देश भक्त दिखलाया । वे देश के लिए मर मिटे पर शत्रु के आगे झुके नही । उन्होने यह निश्चय किया था कि
                सर कटा देंगे मगर सर झुकाएंगे नहीं।
जो कुछ हमने प्राप्त किया है तथा जो कुछ हम बन पाए है, इन्ही के परिणाम स्वरूप हम स्वतंत्रता मे सांस ले रहे है। इसलिए इन वीरों से प्रेरणा ले कर हम भी निस्वार्थ भाव से अपने देश की सेवा करने का प्रण करना चाहिए तथा अपने देश की रक्षा करनी चाहिए।

Marketing Research Process Procedure

 Q. Explain the procedure of conducting marketing research .  Ans. Marketing research process consists a sequence of several steps, these st...